Newway-4

Wednesday, 12 December 2018

शायरी दिल की गहराई से

जेठ के महीने में पत्तों से ओस चुनता हूं...(२)

बैठ करके तनहा अक्सर तुम्हारे ख्वाब बुनता हूं

तुम आओ तो सही अपने हुस्न ए दीदार को

इस तरह ना तड़पाओ अपने दिलदार को 

राह में तुम्हारी रातों को बैठकर तारे गिनता हूं 

जिंदगी के फेसबुक पर जज्बात रोज पोस्ट करता हूं

लोग कहते हैं मोहब्बत करना गुनाह है मैं तो यह हर रोज करता हूं

जेठ के महीने में पत्तों से ओस चुनता हूं.......